???? हरिपुरबच्ची और हरीपुर लच्ची में गुलदार की दहशत! गांवों में खौफ का साया, प्रशासन इंतज़ार में?
हल्दुचौड़। संवाददाता
हल्दुचौड़ के हरिपुर लच्ची और हरिपुर बच्ची गांवों में इन दिनों गुलदार का आतंक लोगों की नींद उड़ा चुका है। शाम ढलते ही गांव की गलियाँ सूनी पड़ जाती हैं, दरवाज़े बंद हो जाते हैं, और हर झाड़ी की सरसराहट अब डर का दूसरा नाम बन चुकी है।
गांव की महिलाओं का कहना है —
“बच्चों को स्कूल भेजते वक्त दिल बैठ जाता है, और शाम को घर लौटने तक चैन नहीं मिलता। गुलदार कभी भी, कहीं भी दिख जाता है।”
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में तीन बार गुलदार की सक्रियता देखी गई है। खेतों में काम कर रहे लोगों पर झपटने की कोशिश, मवेशियों पर हमले, और रात के सन्नाटे में आती डरावनी दहाड़ — गांव का हर कोना अब खतरे की दस्तक दे रहा है।
⚠️ प्रशासन मौन, जंगल विभाग की “कागजी गश्त”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और प्रशासन अब तक सिर्फ निरीक्षण और आश्वासन तक ही सीमित है। ग्रामीण कहते हैं कि जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होती, तब तक कार्रवाई का पहिया घूमता ही नहीं।
“हम जानवर नहीं, इंसान हैं… फिर भी लगता है जैसे हमारी जान की कीमत किसी रिपोर्ट से कम है,”
— यह कहते हुए हरिपुर लच्ची की एक बुजुर्ग महिला की आंखें नम हो जाती हैं।
???? बच्चों की सुरक्षा पर संकट
गांव के स्कूलों में उपस्थिति लगातार घट रही है। कई अभिभावक अब बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। शाम होते ही ग्रामीण अपने मवेशियों को घरों में बांध लेते हैं और गांव की चौपालों पर पहरा देने लगते हैं।
???? खतरे की घंटी या चेतावनी का इंतज़ार?
वन विभाग की ओर से गुलदार की लोकेशन ट्रैकिंग और पिंजरा लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन मौके पर कार्रवाई के नाम पर अभी तक कुछ ठोस नहीं हुआ। ग्रामीण सवाल कर रहे हैं —
“क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है?”
???? ग्रामीणों की मांग
- गांव के आसपास रात में गश्त और सर्च लाइट व्यवस्था
- फॉरेस्ट गार्ड्स की टीम की तैनाती
- गुलदार को पकड़ने के लिए तत्काल पिंजरे की व्यवस्था
- स्कूलों के आसपास सुरक्षा निगरानी
???? समाप्ति नोट:
हरिपुर के इन दोनों गांवों में अब डर सिर्फ एक जानवर का नहीं, बल्कि प्रणाली की सुस्ती का भी है। सवाल वही है —
“क्या किसी और जान की कीमत चुकने के बाद ही जागेगा प्रशासन?”







