NH-109 बना ‘मौत का ट्रैक’! नामकरण संस्कार से लौट रहे 25 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत, बहन जिंदगी की जंग लड़ रही
लालकुआं।
राष्ट्रीय राजमार्ग 109 पर रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। फोरलेन बनने के बाद जहां वाहन सरपट दौड़ रहे हैं, वहीं सड़क हादसों का ग्राफ भी भयावह रूप से बढ़ा है। आए दिन हो रही दुर्घटनाएं कई परिवारों के चिराग बुझा चुकी हैं। ताजा मामला हल्दूचौड़ क्षेत्र के बच्चीधर्मा गांव का है, जहां एक युवा की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।
बच्चीधर्मा निवासी 25 वर्षीय नीरज फुलारा पुत्र स्व. भुवन फुलारा की रुद्रपुर में हुए भीषण सड़क हादसे में मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी बड़ी बहन प्रियंका गंभीर रूप से घायल हो गईं।
नामकरण संस्कार से लौटते समय टूटा परिवार पर कहर
प्राप्त जानकारी के अनुसार नीरज अपनी बहन और अन्य परिजनों के साथ रुद्रपुर में एक रिश्तेदार के नामकरण संस्कार में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वह अपनी बहन प्रियंका के साथ बाइक से घर लौट रहे थे।
बताया जा रहा है कि पत्थरचट्टा के पास अचानक उनकी बाइक एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि नीरज ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
15 साल पहले पिता की भी हो चुकी है हादसे में मौत
इस दर्दनाक घटना ने परिवार के जख्म फिर से हरे कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 15 वर्ष पूर्व होली के समय नीरज के पिता भुवन फुलारा की भी एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अब बेटे की असमय मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है।
एक ही परिवार में दो सड़क हादसों ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोगों में हाईवे पर बढ़ती रफ्तार को लेकर भारी आक्रोश भी देखा जा रहा है।
बहन की हालत गंभीर
हादसे में गंभीर रूप से घायल प्रियंका को तत्काल हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।
सवाल खड़ा करता हादसा:
क्या फोरलेन हाईवे सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं?
क्या ओवरस्पीड और भारी वाहनों पर नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था है?
लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो न जाने कितने और घरों के चिराग बुझेंगे।
चीफ एडिटर राहुल दुमका






