चमोली में फिर बरसी आफत: बादल फटने से दो गांव तबाह, 9 लोग लापता
चमोली। उत्तराखंड का पहाड़ी जिला चमोली एक बार फिर बादल फटने की आपदा की चपेट में है। नंदा नगर क्षेत्र के कुंतरी और धुर्मा गांव बुधवार देर रात तबाह हो गए। दोनों गांवों में 11 से ज्यादा घर मलबे में दब गए, जबकि कुंतरी में 7 और धुर्मा में 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
कुंतरी और धुर्मा में हाहाकार
कुंतरी गांव में देखते ही देखते छह मकान जमींदोज हो गए। ग्रामीणों के मुताबिक लोग घरों में सो रहे थे, तभी अचानक मलबा घरों को अपने साथ बहा ले गया। वहीं धुर्मा गांव में भी पांच मकान ढह गए और कई लोग सुरक्षित स्थानों पर भाग निकले। यहां से दो लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश तेज़ी से जारी है।
राहत-बचाव में मुश्किलें
स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही है, लेकिन भारी बारिश, उफनती नदियां और रास्तों पर मलबा रेस्क्यू ऑपरेशन को चुनौती दे रहे हैं। मोक्ष नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है, जिससे आस-पास के गांवों में भी दहशत का माहौल है।
मौसम विभाग का रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने चमोली समेत कई जिलों के लिए 20 सितंबर तक रेड अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे के ढहने की आशंका जताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिन और मुश्किल हो सकते हैं।
लगातार बरस रही आपदाएं
यह घटना चार दिन पहले देहरादून के सहस्त्रधारा में हुए भीषण बादल फटने के बाद हुई, जिसमें कम से कम 13 लोगों की जान गई थी। उस दौरान सड़कें बह गईं, घर और दुकानें ढह गए और दो बड़े पुल नष्ट हो गए थे। टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर भी पानी और मलबे से पट गया था।
गांवों में डर और बेबसी
कुंतरी और धुर्मा गांव के लोग अब भी सदमे में हैं। कुछ परिवार मलबे में दबे अपने अपनों को ढूंढ रहे हैं, तो कई बेघर होकर पड़ोसियों के घरों और स्कूल भवनों में शरण लिए हुए हैं। पहाड़ पर आसमान से बरस रही आफत ने लोगों को डर, बेबसी और अनिश्चितता में डाल दिया है।
चीफ एडिटर राहुल दुमका







