ढाई किमी पहाड़ चढ़कर पहुंचती हैं स्कूल, जुनून ने दिलाया राष्ट्रपति पुरस्कार
चम्पावत।
कभी-कभी संघर्ष ही इंसान को नई ऊँचाई पर ले जाता है। चम्पावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के एक छोटे से पहाड़ी गांव च्यूरानी में रोज़ ढाई किलोमीटर पैदल पहाड़ चढ़कर बच्चों को पढ़ाने पहुंचने वाली शिक्षिका मंजूबाला अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और नवाचार को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चुना गया है।
अंग्रेजी को बनाया बच्चों का दोस्त
जहां गांव के बच्चे अंग्रेजी को मुश्किल और दूर की भाषा मानते थे, वहीं मंजूबाला ने इसे आसान और रोचक बना दिया। 2005 से च्यूरानी विद्यालय में कार्यरत मंजूबाला ने 2011 में स्कूल को जिले का पहला अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बना दिया। यही नहीं, नियमित कक्षाओं के साथ वे इवनिंग क्लास भी लेती हैं। बच्चों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा कुमाउनी भी सिखाती हैं।
स्काउट-गाइड से लेकर जीवन मूल्यों तक
मंजूबाला सिर्फ किताबें ही नहीं पढ़ातीं, बल्कि बच्चों को जीवन जीने के मूल्य भी सिखाती हैं। स्काउट एंड गाइड की ब्लॉक सचिव रह चुकीं मंजूबाला इस समय गाइड कैप्टन हैं। उनके छात्र आज सेना, एसएसबी, नवोदय और कस्तूरबा गांधी विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जगह बना चुके हैं।
संघर्ष के बीच चमकी रोशनी
च्यूरानी गांव खुद आपदा प्रभावित है। 2022 में आपदा के बाद कई परिवार पलायन कर चुके हैं। स्कूल के भी कई विद्यार्थी अब दूसरे गांवों में शिफ्ट हो गए। आज इस विद्यालय में मात्र छह बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन मंजूबाला का कहना है – “बच्चों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन उनके सपनों को बड़ा बनाना ही मेरी जिम्मेदारी है।”
पुरस्कारों की लंबी लिस्ट
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पहले भी मंजूबाला कई सम्मान अपने नाम कर चुकी हैं। उन्हें 2021 में शैलेश मटियानी पुरस्कार, 2022 में तीलू रौतेली सम्मान, 2023 में आयरन लेडी अवार्ड, 2020 में एमएचआरडी से टीचर ऑफ द ईयर, दो बार एनएचआरओ से सोशल वर्कर अवार्ड, शिक्षक सारथी और अनमोल रतन पुरस्कार मिल चुके हैं।
पांच सितंबर को विज्ञान भवन में सम्मान
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी सूची में मंजूबाला का नाम शामिल होने के बाद पूरा चम्पावत गर्व महसूस कर रहा है। इस साल देशभर से चुने गए 45 शिक्षकों में से मंजूबाला उत्तराखंड की इकलौती शिक्षिका हैं। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा।
चीफ एडिटर राहुल दुमका







